Upper circuit : ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LPG सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे भारत में गैस की कमी और दामों में तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ से होकर भारत की लगभग 80–90% LPG आयात होती है, यहां रुकावट से इंडस्ट्री और कमर्शियल किचन तक गैस की आपूर्ति 2 से 8 दिन तक देरी से पहुंच रही है।
भारत अपनी लगभग 65% कुकिंग LPG इस संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए वैश्विक गैस संकट का सीधा झटका घरेलू बाजार पर दिख रहा है। इसी गैस कमी और दामों की तेजी की थीम ने एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी छोटी कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार उछाल पैदा किया है।
गगन गैसेस का बिजनेस मॉडल
गगन गैसेस लिमिटेड एक छोटी कैप वाली कंपनी है जो प्राइवेट सेक्टर में LPG डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है और साथ ही ल्युब्रिकेंट्स की मार्केटिंग भी करती है। कंपनी का ऑपरेशन सीधे LPG डिमांड, गैस की उपलब्धता और थोक कीमतों से जुड़ा है, इसलिए सप्लाई संकट के समय इसके मार्जिन और वॉल्यूम दोनों पर असर पड़ सकता है।
फाइनेंशियल रिजल्ट में दिखता है कि दिसंबर 2025 खत्म तिमाही (Q3FY26) में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल दर साल 10.6% घटकर 8.07 लाख रुपये रहा, जबकि मटेरियल कॉस्ट में लगभग 15–16% की बढ़ोतरी ने मार्जिन पर दबाव डाला। मार्च 2025 तक कंपनी की सालाना नेट सेल्स लगभग 1.05 करोड़ रुपये रही जो पिछली साल की तुलना में लगभग 64% ज्यादा है, इससे यह साफ है कि रेवेन्यू बढ़ा लेकिन कॉस्ट प्रेशर के कारण मुनाफे की ग्रोथ उतनी मजबूत नहीं रही।
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शेयर प्राइस, अपर सर्किट और ताज़ा तेजी
गैस संकट और युद्ध की खबरों के बीच गगन गैसेस के शेयर ने हाल में तेज उछाल दिखाया और छोटे दायरे वाली कंपनी होते हुए भी इसमें अपर सर्किट का जोर देखा गया। 13 मार्च 2026 को बीएसई पर गगन गैसेस का शेयर 24.89 रुपये के आसपास खुलकर 27.25 रुपये तक पहुंचा, जबकि उस दिन इसके लिए ऊपरी सर्किट लिमिट 35.97 रुपये और निचली सर्किट लिमिट 29.43 रुपये तय थी।
फरवरी 2026 की शुरुआत में शेयर कीमत लगभग 22.08 रुपये थी और तब कंपनी का मार्केट कैप करीब 10 करोड़ रुपये था, जो मार्च मध्य तक बढ़कर लगभग 14.8 करोड़–15 करोड़ रुपये के दायरे में पहुंच गया। बीएसई डेटा के अनुसार स्टॉक का 52 वीक हाई 35.97 रुपये और 52 वीक लो 17.61 रुपये के आसपास रहा है, यानी एक साल में इसने लगभग दोगुना रेंज कवर की है, जो गैस सेक्टर में चल रही तेज़ी और सट्टेबाज़ी दोनों को दिखाता है।
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हालिया वित्तीय प्रदर्शन और रिस्क फैक्टर
कंपनी के Q3FY26 रिजल्ट से पता चलता है कि नेट प्रॉफिट 8.07 लाख रुपये रहा जो पिछले साल की 9.03 लाख रुपये की तुलना में 10.6% कम है, जबकि रेवेन्यू में क्रमिक सुधार दिखा है। मटेरियल कॉस्ट Q3FY26 में 138.88–138.94 लाख रुपये के आसपास रही जो सालाना आधार पर लगभग 11–16% ज्यादा है, इससे कंपनी के मार्जिन पर दबाव साफ दिखता है। लंबी अवधि में LPG की शॉर्टेज, आयात लागत में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल रिस्क जैसे फैक्टर इस तरह की छोटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए ऑपरेशनल चैलेंज भी बढ़ा सकते हैं, खासकर तब जब मार्केट कैप 15 करोड़ रुपये से कम–ज्यादा के छोटे दायरे में हो और वोलैटिलिटी बहुत अधिक हो।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।






