Power sector : अगर आप कम प्राइस पर अच्छे बिजनेस ढूंढ रहे हैं तो पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कई ऐसी कंपनियां हैं जो ₹150 से नीचे ट्रेड करते हुए भी मजबूत रेवेन्यू, प्रॉफिट और ऑर्डर बुक दिखा रही हैं। यह शेयर लो प्राइस होने के बावजूद अपने सेक्टर में अच्छा मार्केट शेयर और ग्रोथ संभावनाएं रखते हैं।
Power sector में Suzlon Energy की तेजी
Suzlon Energy लिमिटेड रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस देने वाली भारत की प्रमुख कंपनियों में से एक है, जो मुख्य रूप से विंड टरबाइन जेनरेटर बनाती है और 17 से ज्यादा देशों में ऑपरेट करती है। मार्च 2026 के आसपास इसका शेयर प्राइस लगभग ₹65 के पास ट्रेड हो रहा था और कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹88,000 करोड़ के ऊपर पहुंच चुका है, जो रिन्यूएबल पावर सेक्टर में इसकी मजबूत पोजीशन दिखाता है। ग्रीन एनर्जी पर सरकारी फोकस बढ़ने से कंपनी को नई कैपेसिटी और ऑर्डर पाइपलाइन में फायदा मिल रहा है।
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पॉवर और ग्रीन एनर्जी में अन्य लो-प्राइस स्टॉक्स
मार्च 2026 तक लो-प्राइस कैटेगरी में Suzlon के साथ अन्य पावर और ग्रीन एनर्जी से जुड़ी कंपनियां भी निवेशकों के रडार पर हैं, जहां शेयर प्राइस लगभग ₹150 से नीचे बने हुए हैं। विभिन्न ब्रोकरेज और रिसर्च प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस सेगमेंट में कई कंपनियां लगातार रेवेन्यू ग्रोथ, घटता डेट और बेहतर कैश फ्लो दिखा रही हैं, जिससे इन्हें फंडामेंटली स्ट्रॉन्ग के तौर पर देखा जा रहा है। ये शेयर प्राइस के हिसाब से सस्ते लग सकते हैं, लेकिन बिजनेस मॉडल, सेक्टर ग्रोथ और गवर्नमेंट पॉलिसी सपोर्ट इन्हें लंबे समय के लिए आकर्षक बनाते हैं।
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₹150 से नीचे स्टॉक्स की लिक्विडिटी और वैल्यूएशन
₹150 से नीचे वाले कई स्टॉक्स में वॉल्यूम अच्छा देखने को मिलता है, जिससे रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए एंट्री और एग्जिट दोनों सुगम रहते हैं। कुछ कंपनियां अपनी अर्निंग्स के मुकाबले लो प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो पर ट्रेड कर रही हैं, जो वैल्यू इन्वेस्टिंग के नजरिए से आकर्षक माना जाता है, वहीं कई में हाई पीई के साथ ग्रोथ स्टोरी प्राइस्ड-इन दिखती है। ऐसे शेयरों को देखते समय निवेशक आमतौर पर रेवेन्यू ट्रेंड, प्रॉफिट मार्जिन, रिटर्न ऑन इक्विटी और डेट-टू-इक्विटी जैसे बेसिक फंडामेंटल पैरामीटर्स पर खास ध्यान देते हैं।
रिसर्च और जोखिम को समझना क्यों जरूरी है
लो प्राइस और फंडामेंटल स्ट्रेंथ वाली कंपनियां पोर्टफोलियो में ग्रोथ का अच्छा स्रोत बन सकती हैं, खासकर जब सेक्टर जैसे पावर, ग्रीन एनर्जी और इन्फ्रास्ट्रक्चर में लंबी अवधि की थीम चल रही हो। हालांकि ऐसे शेयरों में वोलैटिलिटी भी ज्यादा हो सकती है, इसलिए किसी भी स्टॉक में पोजीशन बनाने से पहले कंपनी के ताजा रिजल्ट, मैनेजमेंट कमेंट्री और सेक्टर अपडेशन को खुद देखकर समझना महत्वपूर्ण होता है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







